Saving Account New Update – देश के बैंकिंग उद्योग में खाताधारकों के लिए एक सुखद समाचार है। हाल के महीनों में कई बैंकों ने अपने बचत खातों पर ब्याज दरें बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम विशेष रूप से उन करोड़ों भारतीय नागरिकों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है जो अपनी जमा पूंजी पर बेहतर रिटर्न की तलाश में रहते हैं।
पारंपरिक रूप से बचत खातों पर मिलने वाला ब्याज काफी कम हुआ करता था। लेकिन अब परिदृश्य बदल रहा है। कुछ निजी और लघु वित्त बैंक अपने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी दरें पेश कर रहे हैं। यह बदलाव महंगाई के दौर में बचतकर्ताओं के लिए एक राहत भरा कदम है।
किन बैंकों में मिल रहा अधिक ब्याज
डीसीबी बैंक जैसे कुछ निजी क्षेत्र के बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इस बैंक ने अपने बचत खाताधारकों को अधिकतम 7.25 प्रतिशत तक की ब्याज दर देने की घोषणा की है। यह दर वर्ष 2026 की शुरुआत से प्रभावी हो चुकी है।
इसके अलावा अन्य कई स्मॉल फाइनेंस बैंक और मध्यम आकार के बैंक भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ये संस्थाएं अपने ग्राहक आधार को मजबूत करने और अधिक जमाराशि जुटाने के लिए आकर्षक योजनाएं ला रही हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि सभी सरकारी और निजी बैंक समान दरें नहीं दे रहे हैं।
जमा राशि के आधार पर मिलती है अलग-अलग दरें
अधिकांश बैंकों ने स्तरीय ब्याज दर प्रणाली अपनाई है। इस व्यवस्था में खाते में जमा राशि की मात्रा के अनुसार ब्याज दर तय होती है। जितनी अधिक राशि आपके खाते में होगी, उतनी ही बेहतर ब्याज दर आपको प्राप्त होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि आपके खाते में एक लाख रुपये तक की जमा राशि है, तो आपको मूल ब्याज दर जो लगभग 2.25 प्रतिशत हो सकती है, मिलेगी। जब यह राशि एक लाख से बढ़कर दो लाख रुपये के बीच हो जाती है, तब ब्याज दर बढ़कर 4 प्रतिशत के आसपास हो जाती है।
यदि आपकी जमा राशि दो लाख से पांच लाख रुपये के बीच है, तो आपको 5 प्रतिशत की दर मिल सकती है। पांच लाख से दस लाख रुपये की जमा पर ब्याज दर 6 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। सबसे आकर्षक दर उन खाताधारकों को मिलती है जिनके पास पचास लाख से दो करोड़ रुपये तक की जमा राशि है, जिन्हें 7.25 प्रतिशत तक का ब्याज मिल सकता है।
रेपो रेट का प्रभाव
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति का सीधा असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ता है। जब आरबीआई रेपो रेट में बदलाव करता है, तो बैंक भी अपनी दरों में संशोधन करते हैं। रेपो रेट वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है।
जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए पैसा उधार लेना महंगा हो जाता है। परिणामस्वरूप वे अपने ग्राहकों से जमा राशि आकर्षित करने के लिए बेहतर ब्याज दरें देने को प्रेरित होते हैं। इसी कारण हाल के समय में बचत खातों पर ब्याज दरें बढ़ी हैं।
ग्राहकों के लिए सुझाव
यदि आप भी अपनी बचत पर बेहतर रिटर्न चाहते हैं, तो आपको सक्रिय रूप से विभिन्न बैंकों की दरों की तुलना करनी चाहिए। हर बैंक की अपनी ब्याज दर नीति होती है और वे अलग-अलग श्रेणियों में अलग-अलग दरें देते हैं। इसलिए अपनी जमा राशि के अनुसार सबसे उपयुक्त विकल्प चुनना महत्वपूर्ण है।
केवल ब्याज दर देखकर ही निर्णय न लें। बैंक की अन्य सेवाएं, शाखा नेटवर्क, डिजिटल सुविधाएं और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता भी देखें। साथ ही न्यूनतम बैलेंस की आवश्यकता और अन्य शुल्कों की जानकारी भी अवश्य प्राप्त करें। कभी-कभी उच्च ब्याज दर के साथ कुछ अतिरिक्त शर्तें भी जुड़ी हो सकती हैं।
कर संबंधी जानकारी
बचत खाते से प्राप्त ब्याज आय पर आयकर के नियम लागू होते हैं। वर्तमान कर कानूनों के अनुसार, बचत खाते से अर्जित ब्याज आय को आपकी कुल आय में जोड़ा जाता है। हालांकि आयकर अधिनियम की धारा 80TTA के तहत 10,000 रुपये तक की बचत खाता ब्याज आय पर छूट उपलब्ध है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए धारा 80TTB के तहत यह सीमा 50,000 रुपये तक है। इससे अधिक की ब्याज आय पर आपको अपने आयकर स्लैब के अनुसार कर देना होगा। इसलिए अपनी कर देयता का उचित हिसाब रखें और वित्तीय योजना बनाते समय इसे ध्यान में रखें।
बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा
वर्तमान में बैंकिंग क्षेत्र में जमा राशि को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। डिजिटल बैंकिंग के युग में ग्राहकों के पास बेहतर विकल्पों तक पहुंच आसान हो गई है। वे आसानी से विभिन्न बैंकों की दरों की तुलना कर सकते हैं और अपने लिए सर्वोत्तम विकल्प चुन सकते हैं।
यह प्रतिस्पर्धा ग्राहकों के हित में है। इससे बैंक अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने और आकर्षक दरें देने के लिए प्रेरित होते हैं। छोटे और नए बैंक विशेष रूप से अपने ग्राहक आधार को बढ़ाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रहे हैं।
सुरक्षा भी है महत्वपूर्ण
उच्च ब्याज दर के लालच में किसी भी बैंक में खाता खोलने से पहले उसकी विश्वसनीयता और सुरक्षा का आकलन जरूर करें। सुनिश्चित करें कि बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित है और जमा बीमा एवं प्रत्यय गारंटी निगम (DICGC) के अंतर्गत आता है। यह संस्था पांच लाख रुपये तक की जमा राशि का बीमा प्रदान करती है।
बैंक की वित्तीय स्थिति, उसकी रेटिंग और बाजार में प्रतिष्ठा की भी जांच करें। लंबी अवधि में सुरक्षा और स्थिरता उच्च ब्याज दर से अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। अपनी जमा राशि को विभिन्न बैंकों में विभाजित करना भी एक बुद्धिमानी भरा निर्णय हो सकता है।
बचत खातों पर बढ़ी हुई ब्याज दरें भारतीय बचतकर्ताओं के लिए एक सकारात्मक विकास है। यह उन्हें अपनी मेहनत की कमाई पर बेहतर रिटर्न पाने का अवसर देता है। हालांकि निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है।
विभिन्न बैंकों की दरों की तुलना करें, शर्तों को समझें और अपनी जरूरतों के अनुसार सही विकल्प चुनें। याद रखें कि बैंकों की नीतियां समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए नवीनतम जानकारी के लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट देखें या ग्राहक सेवा से संपर्क करें। सूचित निर्णय ही सर्वोत्तम वित्तीय परिणाम देता है।









