Rains & Snow – भारत के उत्तरी राज्यों में मौसम ने अचानक करवट ली है और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो चुका है जबकि मैदानी भागों में बारिश की फुहारें लोगों को राहत दे रही हैं। मौसम विज्ञान विभाग ने आगामी दिनों में इन गतिविधियों के और तेज होने की भविष्यवाणी की है। यह मौसमी बदलाव न केवल तापमान को प्रभावित कर रहा है बल्कि दैनिक जीवन और कृषि गतिविधियों पर भी असर डाल रहा है।
समुद्री नमी का प्रभाव और बादलों की आवाजाही
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमीयुक्त हवाओं ने उत्तर-पश्चिम भारत की ओर अपना रुख किया है। इन हवाओं के कारण पाकिस्तान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बादलों का घनत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। समुद्री तटों से आने वाली यह नमी वायुमंडलीय परिस्थितियों के साथ मिलकर एक शक्तिशाली मौसम प्रणाली का निर्माण कर रही है। इस परिघटना का विस्तार अब राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तक हो गया है, जहां आकाश में बादलों की चादर छाई हुई है।
विभिन्न स्थानों पर पहले से ही हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा चुकी है। कुछ इलाकों में रिमझिम फुहारें पड़ रही हैं तो कई जगहों पर तेज बौछारें देखी गई हैं। यह बारिश सर्दियों के मौसम में एक स्वागत योग्य बदलाव है क्योंकि यह न केवल वायु की गुणवत्ता में सुधार करती है बल्कि रबी की फसलों के लिए भी फायदेमंद साबित होती है। किसानों के लिए यह प्राकृतिक सिंचाई का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन रही है जो फसल उत्पादन को बढ़ावा देने में सहायक होगी।
अगले 24 घंटों में मौसमी गतिविधियों में तेजी की संभावना
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले 24 घंटों में बारिश और बर्फबारी की गतिविधियां और अधिक सघन होने वाली हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी हिमपात की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है। यह बर्फबारी 23 जनवरी की रात्रि से प्रारंभ होकर 24 और 25 जनवरी तक निरंतर जारी रह सकती है। पहाड़ी रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं और कुछ मार्गों पर यातायात बाधित होने की आशंका है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के विभिन्न हिस्सों में वर्षा की तीव्रता बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। इन क्षेत्रों में केवल बारिश ही नहीं बल्कि कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है। ओलों के गिरने से खुले में रखे वाहनों और फसलों को नुकसान हो सकता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। किसानों को विशेष रूप से अपनी खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए।
उत्तर प्रदेश में वर्षा का विस्तार
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में मौसम की हलचल तेज होने की प्रबल संभावना है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बरेली जैसे जिलों में बारिश में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है। ये क्षेत्र पहले से ही हल्की बौछारों का अनुभव कर रहे हैं लेकिन आने वाले समय में इसकी तीव्रता बढ़ने की आशा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह इलाका कृषि प्रधान है और यहां की गन्ना तथा गेहूं की फसलों के लिए यह बारिश वरदान साबित हो सकती है।
24 जनवरी तक इस वर्षा प्रणाली का विस्तार पूर्वी उत्तर प्रदेश तक फैलने की संभावना है। वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में भी बादल छाए रहेंगे और बारिश हो सकती है। यह पूर्वी क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मौसमी घटना होगी क्योंकि यहां अपेक्षाकृत कम वर्षा होती है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे मौसम अपडेट पर नजर रखें और आवश्यक सावधानियां बरतें।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में मौसमी परिवर्तन
राजस्थान के कई भागों में भी वर्षा गतिविधियों के संकेत मिल रहे हैं। जयपुर, अजमेर, अलवर और आसपास के जिलों में बारिश होने की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है। राजस्थान में सर्दियों के मौसम में बारिश अपेक्षाकृत दुर्लभ घटना है लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के कारण ऐसा संभव हो पाता है। यह वर्षा रेगिस्तानी राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भूजल स्तर को बढ़ाने और मिट्टी की नमी को बनाए रखने में सहायक होती है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग में भी मौसमी हलचल देखने को मिल सकती है। हालांकि यहां की बारिश उत्तर प्रदेश या पंजाब जितनी तेज नहीं होगी, फिर भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज हो सकती है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड और शिवपुरी जिलों में बादल छाए रह सकते हैं। इस क्षेत्र के किसान इस बारिश का स्वागत करेंगे क्योंकि यह चने, गेहूं और सरसों जैसी फसलों के लिए लाभकारी होगी।
दक्षिण भारत में तमिलनाडु का मौसम
दक्षिण भारत में तमिलनाडु में भी हल्की वर्षा शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। यह बारिश 25 जनवरी तक धीरे-धीरे बढ़ सकती है। तमिलनाडु के तटीय और आंतरिक जिलों में बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर रिमझिम बारिश हो सकती है। चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम और अन्य तटीय इलाकों में समुद्री हवाओं के प्रभाव से मौसम सुहावना रहेगा। यह वर्षा राज्य की जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि तमिलनाडु पहले से ही जल संकट का सामना कर रहा है।
मौसम में अस्थायी विराम और अगला पश्चिमी विक्षोभ
25-26 जनवरी को उत्तर भारत के अधिकांश भागों में बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आने का अनुमान है। यह एक अस्थायी विराम होगा जब मौसम अपेक्षाकृत शांत रहेगा और आकाश साफ हो सकता है। हालांकि, यह शांति अधिक समय तक नहीं टिकेगी क्योंकि एक नया पश्चिमी विक्षोभ रास्ते में है। मौसम विज्ञान विभाग ने 27-28 जनवरी को एक और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के आगमन की भविष्यवाणी की है जो फिर से पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में मौसम को प्रभावित करेगा।
इस नए विक्षोभ के कारण हिमालयी क्षेत्रों में पुनः भारी बर्फबारी हो सकती है। मैदानी इलाकों में भी बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। यह निरंतर मौसमी गतिविधि सर्दियों के मौसम के लिए असामान्य नहीं है लेकिन इसकी तीव्रता और आवृत्ति कृषि और दैनिक जीवन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। पर्यटकों को पहाड़ी इलाकों की यात्रा से पहले मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए।
पूर्वी और मध्य भारत में शुष्क मौसम
जबकि उत्तर और पश्चिम भारत में मौसमी हलचल जारी है, पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बारिश की कोई संभावना नहीं है। इन क्षेत्रों में आकाश साफ रहेगा और मौसम ठंडा और शुष्क बना रहेगा। दिन का तापमान सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है लेकिन कोई गंभीर ठंड नहीं पड़ेगी।
इन राज्यों में सूर्य की धूप अच्छी रहेगी जो रबी की फसलों के लिए अनुकूल है। हालांकि, रात और सुबह के समय कोहरा छाया रह सकता है जो दृश्यता को प्रभावित कर सकता है। वाहन चालकों को सावधानीपूर्वक गाड़ी चलाने की सलाह दी जाती है। इन क्षेत्रों के किसानों को सिंचाई पर विशेष ध्यान देना होगा क्योंकि प्राकृतिक वर्षा की संभावना नहीं है।
सावधानियां और तैयारियां
इस मौसमी बदलाव को देखते हुए, लोगों को कुछ आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को गर्म कपड़े और आवश्यक सामान साथ रखना चाहिए। बर्फबारी के कारण सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं इसलिए सावधानी से गाड़ी चलाएं। मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को छाता और रेनकोट साथ रखना चाहिए। ओलावृष्टि की संभावना वाले क्षेत्रों में लोगों को वाहनों को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करना चाहिए।
किसानों को अपनी खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। यदि संभव हो तो फसलों को ढकने की व्यवस्था करें। पशुपालकों को अपने पशुओं को ठंड और बारिश से बचाने के लिए उचित आश्रय प्रदान करना चाहिए। बिजली विभागों को बिजली आपूर्ति में संभावित व्यवधान के लिए तैयार रहना चाहिए और तुरंत मरम्मत की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।









