Home Rent Rules – शहरी जीवन में किराए पर मकान लेना और देना एक आम बात हो चुकी है। रोजगार, शिक्षा या बेहतर जीवनशैली की खोज में लोग नियमित रूप से शहर बदलते रहते हैं और ऐसी परिस्थितियों में किराए का आवास सबसे उपयुक्त समाधान होता है। लेकिन पिछले कई दशकों से किराए से संबंधित असहमति, कानूनी जटिलताएं और आपसी विवाद एक गंभीर समस्या बने रहे हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 से किराएदारी से जुड़े संशोधित कानून प्रभावी किए हैं, जो संपत्ति स्वामियों और किरायेदारों दोनों के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाले हैं।
पूर्ववर्ती किराया प्रणाली की कमियां
अब तक भारत में किराए से जुड़ी कोई समान और सुदृढ़ कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं थी। अधिकांश स्थानों पर लोग मौखिक समझौतों के आधार पर ही संपत्ति किराए पर दे देते थे या फिर साधारण कागज पर कुछ बुनियादी शर्तें नोट कर लेते थे। जब तक सभी बातें सुचारू रूप से चलती रहतीं, कोई परेशानी नहीं होती थी। परंतु जैसे ही किराया वृद्धि, संपत्ति खाली कराने या जमा राशि वापसी का मुद्दा उठता था, गंभीर मतभेद सामने आ जाते थे। कई संपत्ति मालिक बिना किसी पूर्व सूचना के किराया बढ़ा देते थे या अचानक संपत्ति खाली करने की मांग करते थे। दूसरी ओर, कुछ किरायेदार महीनों तक किराया भुगतान नहीं करते थे और मालिक के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाना अत्यंत कठिन हो जाता था। सबसे अधिक विवाद जमानत राशि को लेकर उत्पन्न होते थे, जो कई मामलों में कभी वापस नहीं मिलती थी।
नवीन नियमावली का उद्देश्य
सरकार ने किराए की इस अनियमित स्थिति में सुधार लाने के लिए मॉडल किराएदारी अधिनियम पर आधारित नए कानून तैयार किए हैं। इनका मूल उद्देश्य किराए की समस्त प्रक्रिया को पारदर्शी, दस्तावेजीकृत और कानूनी रूप से वैध बनाना है। अब किराए का करार केवल पारस्परिक विश्वास पर नहीं, बल्कि स्पष्ट नियमों और कानूनी ढांचे के अंतर्गत संपन्न होगा। इन कानूनों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि न तो संपत्ति मालिक को हानि पहुंचे और न ही किरायेदार के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो। दोनों पक्षों की जवाबदेहियां और अधिकार पूर्व निर्धारित होंगे, जिससे भविष्य में असहमति की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।
किराया करार की नई प्रक्रिया
नवीन नियमों के अनुसार किराए का समझौता अनिवार्य रूप से लिखित और निर्धारित प्रारूप में होना आवश्यक होगा। इसमें संपत्ति स्वामी और किरायेदार दोनों की संपूर्ण जानकारी अंकित की जाएगी। संपत्ति का स्थान, किराया राशि, भुगतान की निर्धारित तिथि, करार की अवधि, जमानत राशि और किराया वृद्धि की शर्तें स्पष्ट रूप से उल्लिखित होंगी। इस समझौते को स्थानीय प्राधिकरण के समक्ष पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के पश्चात यह समझौता एक वैध कानूनी दस्तावेज बन जाएगा, जिसे किसी भी विवाद की परिस्थिति में प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा। इससे मौखिक वादों और भ्रम की स्थिति लगभग समाप्त हो जाएगी।
जमानत राशि में महत्वपूर्ण परिवर्तन
सुरक्षा जमा राशि को लेकर नए कानून अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब संपत्ति मालिक अपनी इच्छानुसार कोई भी राशि जमानत के नाम पर नहीं ले सकेंगे। नवीन प्रावधानों के अनुसार सुरक्षा जमा राशि अधिकतम दो माह के किराए के समतुल्य ही होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी आवास का मासिक किराया 15 हजार रुपये है, तो मालिक अधिकतम 30 हजार रुपये ही जमानत के रूप में स्वीकार कर सकता है। जब किरायेदार संपत्ति खाली करेगा, तो निर्धारित समयावधि के अंदर यह राशि वापस करना अनिवार्य होगा। यदि संपत्ति में कोई क्षति हुई है, तो उसकी मरम्मत का व्यय काटकर शेष धनराशि लौटानी होगी।
किराया वृद्धि के संशोधित प्रावधान
अब किराया बढ़ाना भी पूर्णतः नियमों के दायरे में संचालित होगा। संपत्ति मालिक अपनी मर्जी से किसी भी समय किराया नहीं बढ़ा सकते। किराया वृद्धि केवल तभी संभव होगी, जब इसका स्पष्ट प्रावधान पहले से किराया करार में अंकित हो। सामान्यतः किराया वर्ष में एक बार और पूर्व निर्धारित प्रतिशत के अनुरूप ही बढ़ाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त मालिक को किरायेदार को पूर्व में लिखित सूचना प्रदान करना अनिवार्य होगा। यदि समझौते में किराया वृद्धि की कोई शर्त उल्लिखित नहीं है, तो उस करार की अवधि के दौरान किराया नहीं बढ़ाया जा सकता।
संपत्ति खाली कराने की कड़ी प्रक्रिया
नवीन कानूनों के अंतर्गत संपत्ति मालिक बिना ठोस आधार के किरायेदार से आवास खाली करने की मांग नहीं कर सकते। अब इसके लिए वैध कारण होना आवश्यक है, जैसे लगातार किराया भुगतान न करना, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या समझौते की शर्तों का उल्लंघन करना। इन परिस्थितियों में भी मालिक को किरायेदार को उचित नोटिस जारी करना होगा, जो प्रायः तीन माह का होगा। इसी प्रकार यदि किरायेदार स्वयं संपत्ति छोड़ना चाहता है, तो उसे भी पूर्व में नोटिस देना आवश्यक होगा। इससे दोनों पक्षों को वैकल्पिक व्यवस्था करने हेतु पर्याप्त समय मिल जाता है।
विवाद समाधान की त्वरित व्यवस्था
पूर्व में किराए से जुड़े मामले न्यायालयों में वर्षों तक लंबित रहते थे। नवीन नियमों में इसके लिए पृथक किराया न्यायाधिकरण स्थापित करने का प्रावधान है। ये विशेष प्राधिकरण केवल किराए से संबंधित मामलों की सुनवाई करेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि किराए से जुड़े विवादों का साठ दिवस के अंदर निराकरण किया जाए। छोटे मामलों में पारस्परिक समझौते और मध्यस्थता को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि नागरिकों को न्यायालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
संपत्ति मालिकों के अधिकार और दायित्व
नए कानून संपत्ति मालिकों के अधिकारों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं। उन्हें निर्धारित समय पर किराया प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार है। यदि किरायेदार बार-बार किराया भुगतान नहीं करता, तो कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। संपत्ति की बड़ी मरम्मत जैसे छत, दीवार, जल आपूर्ति प्रणाली या विद्युत की मुख्य व्यवस्था की जिम्मेदारी मालिक की होगी। वहीं साधारण छोटी-मोटी मरम्मत किरायेदार को स्वयं करनी होगी। मालिक उचित सूचना देकर संपत्ति का निरीक्षण भी कर सकता है, लेकिन अनावश्यक रूप से परेशान नहीं कर सकता।
किरायेदारों को प्राप्त अधिकार
किरायेदार को संपत्ति में शांतिपूर्वक निवास करने का पूर्ण अधिकार है। मालिक बिना अनुमति संपत्ति में प्रवेश नहीं कर सकता। समझौते में उल्लिखित सभी सुविधाएं किरायेदार को उपलब्ध करानी होंगी। किरायेदार का दायित्व है कि वह समय पर किराया भुगतान करे, संपत्ति की देखभाल करे और पड़ोसियों को परेशान न करे। संपत्ति में कोई बड़ा परिवर्तन करने से पूर्व मालिक की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
कर और कानूनी पहलू
किराए से अर्जित आय पर कर भुगतान संपत्ति मालिक की जिम्मेदारी होगी। नए कानूनों के अंतर्गत सभी किराया समझौते पंजीकृत होंगे, जिससे कर चोरी करना कठिन हो जाएगा। किरायेदार यदि गृह किराया भत्ते का लाभ लेना चाहता है, तो उसके पास किराए की रसीद और पंजीकृत समझौता होना आवश्यक होगा। इससे कर संबंधी मामलों में पारदर्शिता आएगी।
राज्य सरकारों की भूमिका और कार्यान्वयन
ये नियम केंद्र सरकार के मॉडल अधिनियम पर आधारित हैं, परंतु इन्हें लागू करने की जवाबदेही राज्य सरकारों की होगी। कुछ राज्यों ने इन्हें पहले ही लागू कर दिया है, जबकि शेष राज्यों में प्रक्रिया प्रगति पर है। प्रारंभ में नागरिकों को नए कानून समझने में समय लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यवस्था सामान्य हो जाएगी। सरकार का प्रयास है कि किराए की संपूर्ण प्रणाली व्यवस्थित और विश्वसनीय बने।
आम नागरिकों के लिए आवश्यक सुझाव
जो व्यक्ति किराए पर संपत्ति ले रहे हैं या देने की योजना बना रहे हैं, उन्हें नए कानूनों को सावधानीपूर्वक समझना चाहिए। सदैव लिखित और पंजीकृत समझौता करें। सभी शर्तें स्पष्ट शब्दों में अंकित करें और किसी भी बात को मौखिक न छोड़ें। किराया, जमानत राशि और अन्य भुगतानों की रसीदें अवश्य संभालकर रखें। किसी विवाद की परिस्थिति में पहले पारस्परिक वार्तालाप से समाधान निकालने का प्रयास करें और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सहायता लें।
नवीन किराया कानून संपत्ति मालिकों और किरायेदारों दोनों के लिए व्यापक परिवर्तन लेकर आए हैं। जहां एक ओर मालिकों की स्वेच्छाचारिता पर अंकुश लगेगा, वहीं किरायेदारों को भी अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। यदि इन कानूनों को उचित रूप से अपनाया गया, तो किराए की व्यवस्था अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकती है।









