LPG New Rates 2026 – आज के समय में भारतीय परिवारों की रसोई में एलपीजी सिलेंडर एक अनिवार्य वस्तु बन गया है। चाहे गांव हो या शहर, हर जगह खाना बनाने के लिए घरेलू गैस का उपयोग तेजी से बढ़ा है। पारंपरिक चूल्हे की जगह गैस चूल्हे ने ले ली है क्योंकि यह सुविधाजनक, समय बचाने वाला और स्वच्छ विकल्प है। इसलिए 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के मूल्य में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव हर परिवार की जेब को सीधे प्रभावित करता है।
महंगाई के मौजूदा माहौल में परिवार अपने खर्चों को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। रोजमर्रा की जरूरतों में रसोई गैस एक महत्वपूर्ण खर्च है जिसे टाला नहीं जा सकता। जब गैस सिलेंडर के दाम बढ़ते हैं तो घर का बजट बिगड़ जाता है और जब कीमतें स्थिर रहती हैं या घटती हैं तो राहत महसूस होती है। इसी वजह से हर महीने की पहली तारीख को लोग नए रेट का इंतजार करते हैं।
मूल्य निर्धारण की जटिल व्यवस्था
भारत में एलपीजी की कीमतें तय करने का काम केंद्र सरकार सीधे तौर पर नहीं करती है। यह जिम्मेदारी देश की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के पास है। ये कंपनियां महीने की पहली तारीख को दामों की समीक्षा करती हैं और जरूरत पड़ने पर नए रेट लागू करती हैं।
मूल्य निर्धारण में कई कारक अहम भूमिका निभाते हैं। सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारक है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें। जब विश्व बाजार में तेल महंगा होता है तो एलपीजी के दाम भी बढ़ जाते हैं। दूसरा बड़ा कारक है विदेशी मुद्रा विनिमय दर, खासकर डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत। जब रुपया कमजोर पड़ता है तो आयात महंगा हो जाता है। इसके अलावा आयात शुल्क, परिवहन खर्च, भंडारण लागत और स्थानीय करों का भी दामों पर असर पड़ता है।
सब्सिडी व्यवस्था से मिलती है राहत
आम उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए केंद्र सरकार घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी प्रदान करती है। यह सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डीबीटी योजना के तहत सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में भेजी जाती है। इस व्यवस्था में ग्राहक को पहले सिलेंडर की पूरी कीमत चुकानी पड़ती है और बाद में सब्सिडी की राशि उसके खाते में आ जाती है।
सब्सिडी की राशि स्थिर नहीं रहती बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और सरकार की नीतियों के अनुसार बदलती रहती है। कभी-कभी यह राशि 200 रुपये तक भी हो सकती है और कभी यह बहुत कम भी हो जाती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन देकर सरकार ने लाखों परिवारों को स्वच्छ ईंधन से जोड़ा है।
प्रमुख शहरों में वर्तमान दर
इस समय देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर का मूल्य लगभग 853 रुपये के आसपास है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में यह करीब 852.50 रुपये में उपलब्ध है। पूर्वी भारत के प्रमुख शहर कोलकाता में घरेलू गैस की कीमत लगभग 879 रुपये है जबकि दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण शहर चेन्नई में यह करीब 868.50 रुपये के आसपास बिक रहा है।
इन महानगरों में पिछले कुछ समय से कीमतों में स्थिरता बनी हुई है। कोई बड़ी बढ़ोतरी या कटौती नहीं हुई है जिससे शहरी परिवारों को राहत मिली है। हालांकि इन दामों में समय-समय पर छोटे-मोटे बदलाव होते रहते हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के अधिकृत गैस वितरक से नवीनतम कीमतों की जानकारी लें।
व्यावसायिक सिलेंडर की स्थिति
घरेलू सिलेंडर की तुलना में 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतें काफी अधिक होती हैं। हाल के दिनों में कमर्शियल सिलेंडर के दामों में मामूली कमी आई है जो व्यापारियों के लिए अच्छी खबर है। रेस्तरां, होटल, ढाबे और छोटे खाद्य व्यवसाय चलाने वाले लोगों के लिए गैस एक बड़ा खर्च है।
व्यावसायिक सिलेंडर पर किसी भी तरह की सरकारी सब्सिडी नहीं मिलती है। इसलिए इसके दाम घरेलू सिलेंडर से दोगुने से भी ज्यादा होते हैं। जब इन सिलेंडरों के दाम घटते हैं तो कारोबारियों की परिचालन लागत कम हो जाती है। इसका लाभ कभी-कभी ग्राहकों को भी भोजन की कीमतों में कमी के रूप में मिल सकता है।
क्षेत्रीय विविधता में अंतर
भारत के विभिन्न राज्यों और शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें एक समान नहीं होतीं। यह अंतर मुख्य रूप से परिवहन लागत, स्थानीय करों और वितरण खर्चों के कारण होता है। पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक कठिनाइयों और लंबी दूरी के कारण परिवहन खर्च बहुत अधिक आता है। इसलिए असम, मेघालय, नागालैंड जैसे राज्यों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 1000 रुपये को भी पार कर जाती है।
इसके विपरीत दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में रिफाइनरियों की निकटता और बेहतर परिवहन सुविधाओं के कारण दाम अपेक्षाकृत कम रहते हैं। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कीमतें मध्यम स्तर पर रहती हैं। तटीय क्षेत्रों में आयातित एलपीजी की उपलब्धता के कारण दाम थोड़े नियंत्रित रहते हैं।
आने वाले समय में एलपीजी सिलेंडर के दामों की स्थिति मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करेगी। अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं तो घरेलू स्तर पर भी दामों में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं होगा। सरकार का प्रयास रहता है कि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और जरूरत पड़ने पर सब्सिडी के माध्यम से राहत प्रदान की जाए।
वर्तमान आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में कीमतों में अचानक बड़ी वृद्धि की संभावना कम है। हालांकि उपभोक्ताओं को सतर्क रहना चाहिए और नियमित रूप से अपने स्थानीय गैस एजेंसी से ताजा जानकारी प्राप्त करते रहना चाहिए। सरकार भी डिजिटल माध्यमों से कीमतों की जानकारी उपलब्ध करा रही है जिससे पारदर्शिता बनी रहे।









